शेयर बाजार में गिरावट जारी: सेंसेक्स 400 अंक नीचे, निफ्टी 110 अंक लुढ़का; ट्रंप के ब्रांडेड दवाओं पर 100% टैरिफ से फार्मा शेयरों में 4% तक की कमजोरी
छठे सत्र में बाजार दबाव में, निफ्टी 24,800 के नीचे; सन फार्मा, सिप्ला जैसे स्टॉक्स लुढ़के, एफआईआई बिकवाली ने बढ़ाई चिंता
भोपाल: भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को गिरावट का सिलसिला छठे सत्र तक जारी रहा, जहां सेंसेक्स करीब 400 अंक गिरकर 80,800 के आसपास कारोबार कर रहा था। निफ्टी भी 110 अंक की कमजोरी के साथ 24,800 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ब्रांडेड और पेटेंटेड दवाओं पर 1 अक्टूबर से 100% टैरिफ की घोषणा ने फार्मा सेक्टर को सबसे अधिक प्रभावित किया, जहां प्रमुख कंपनियों के शेयरों में 4% तक की गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक बाजारों की कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने समग्र बाजार को दबाव में डाल दिया।
इंडेक्स का प्रदर्शन
दोपहर 1:30 बजे तक, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर सेंसेक्स 355.82 अंक या 0.44% गिरकर 80,803.86 पर था। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर निफ्टी 115.95 अंक या 0.47% नीचे 24,774.90 पर कारोबार कर रहा था। दिन का शुरुआती कारोबार लाल निशान में ही रहा, जहां सेंसेक्स 240 अंक गिरकर 80,919 पर खुला था। ब्रॉडर मार्केट में मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी 1-2% नीचे रहे, जबकि कुल बाजार पूंजीकरण में 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।
यह गिरावट पिछले सत्र की 556 अंकों की कमजोरी का विस्तार है, जब सेंसेक्स 81,160 पर बंद हुआ था। ट्रेडिंग वॉल्यूम कमजोर रहा, जो निवेशकों के सतर्क रुख को दर्शाता है।
फार्मा सेक्टर पर ट्रंप टैरिफ का असर
ट्रंप की घोषणा ने फार्मा शेयरों को सबसे अधिक झटका दिया। निफ्टी फार्मा इंडेक्स 2.3% से 2.45% लुढ़क गया, जो पांच सत्रों से लगातार गिरावट का शिकार है। सन फार्मा, सिप्ला, डॉ. रेड्डी लैब्स, लुपिन, ऑरोबिंदो फार्मा और ग्लैंड फार्मा जैसे स्टॉक्स में 3-5% की गिरावट आई। नाटको फार्मा और वोकहार्ट जैसे छोटे खिलाड़ी 5% तक नीचे रहे।
ट्रंप ने कहा कि ब्रांडेड या पेटेंटेड फार्मास्यूटिकल प्रोडक्ट्स पर 100% टैरिफ लगेगा, जब तक कंपनियां अमेरिका में उत्पादन सुविधाएं न स्थापित करें। अमेरिका भारत के फार्मा निर्यात का एक तिहाई हिस्सा है, जो मुख्य रूप से जेनेरिक दवाओं पर आधारित है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि जेनेरिक एक्सपोर्टर्स को फिलहाल राहत मिल सकती है, लेकिन ब्रांडेड सेगमेंट पर असर पड़ेगा। इससे अमेरिकी फार्मा निर्यात पर 233 अरब डॉलर का संभावित प्रभाव पड़ सकता है।
अन्य सेक्टरों की स्थिति
आईटी सेक्टर भी दबाव में रहा, जहां इंफोसिस, विप्रो, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक 1-2% नीचे रहे। निफ्टी आईटी इंडेक्स 2025 में 21% गिर चुका है। रियल्टी और फर्नीचर सेक्टर पर भी ट्रंप के अन्य टैरिफ (हेवी ट्रक्स पर 25%, किचन कैबिनेट्स पर 50%) का असर पड़ा। एशियाई बाजारों में भी फार्मा स्टॉक्स गिरे।
बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में हल्की रिकवरी दिखी, लेकिन यह समग्र गिरावट को रोकने में नाकाफी रही। एफआईआई ने 2,500 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जबकि डीआईआई ने खरीदारी की।
वैश्विक संकेत और विशेषज्ञ विश्लेषण
यह गिरावट वैश्विक बाजारों के नकारात्मक संकेतों से प्रेरित है। अमेरिकी इंडेक्स डाउ और नैस्डैक में 0.5-1% की गिरावट आई, जबकि एशियाई बाजार जैसे निक्केई और हैंगसेंग लाल निशान पर रहे। फेडरल रिजर्व की दर कटौती की उम्मीदों में कमी और एच-1बी वीजा फीस बढ़ोतरी ने आईटी को प्रभावित किया।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार ने कहा, “ट्रंप के टैरिफ टैनट्रम्स फिर शुरू हो गए हैं। यह सुधारात्मक गिरावट है, लेकिन निफ्टी 20-दिन के मूविंग एवरेज के पास पहुंचा है, जहां पुलबैक संभव है।” आरबीआई की अगली नीति बैठक में दरों को स्थिर रखने की उम्मीद है।
निवेशकों के लिए सलाह
विशेषज्ञ लंबी अवधि के निवेशकों को एसआईपी जारी रखने और डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो पर फोकस करने की सलाह दे रहे हैं। अगले सत्र में अमेरिकी जॉब डेटा और क्वार्टरली रिजल्ट्स पर नजर रहेगी।
निष्कर्षतः, ट्रंप के टैरिफ से फार्मा पर दबाव बढ़ा है, लेकिन बाजार की यह गिरावट अस्थायी लग रही है। निवेशक सतर्क रहें और अवसरों की तलाश करें।