एडिटर ओपिनियन: अमेरिका का नया H-1B टैक्स नियम: भारतीयों के लिए झटका, भारत के लिए सुनहरा अवसर

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अमेरिका में काम कर रहे भारतीय प्रोफेशनल्स को एक बड़ा झटका लगा है। 21 सितंबर 2025 से अमेरिका में हर कंपनी को विदेशी टैलेंट को H-1B वीज़ा पर रखने के लिए हर साल 1 लाख डॉलर (लगभग ₹88 लाख) का अतिरिक्त टैक्स चुकाना होगा। यह टैक्स हर साल देना अनिवार्य होगा। चूंकि कुल H-1B वीज़ा आवेदनों में 71% भारतीयों का हिस्सा है, इसलिए इसका सबसे बड़ा असर भारतीय टैलेंट पूल पर पड़ेगा। चीन के हिस्से मात्र 12% आवेदन आते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से बड़ी संख्या में भारतीयों को अमेरिका छोड़कर वापस लौटना पड़ सकता है। पहले से ही भारतीय छात्रों के अमेरिका जाने में 35% की गिरावट दर्ज की जा चुकी है और अब वे भारतीय यूनिवर्सिटीज़ को प्राथमिकता दे रहे हैं। हालांकि यह नया नियम वहां काम कर रहे भारतीय परिवारों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन लंबी अवधि में भारत के लिए यह बड़ा अवसर बन सकता है।

अगर भारतीय टैलेंट देश में ही रुकेगा तो स्टार्टअप्स, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन का केंद्र भारत बन सकता है। निवेशक भी उसी जगह निवेश करते हैं जहां टैलेंट मौजूद हो। चीन इसका उदाहरण है। पिछले दो दशकों में चीन का लगभग 80% टैलेंट वहीं रुका और उन्होंने घरेलू स्तर पर बड़ी टेक कंपनियां खड़ी कीं, इनोवेशन किए और ग्लोबल पावर बने।

भारत के पास भी यही अवसर है। आज जो टैलेंट अमेरिका की टेक कंपनियों की रीढ़ बना हुआ है, वही कल भारत में रहकर देश की ताकत बन सकता है। भारत के पास मेहनती और कुशल युवा शक्ति है। ऐसे में यह नया अमेरिकी नियम, जो आज संकट जैसा दिख रहा है, आने वाले समय में भारत की सबसे बड़ी विकास गाथा लिख सकता है।

प्रदीप करम्बेलकर
फाउंडर & एडिटर
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