आरबीआई के मिनट्स का इंतजार; तेल कीमतों में तेजी से जोखिम बढ़ने की आशंका, रुपया भी कमजोर
भारतीय बॉन्ड बाजार में बुधवार को बेंचमार्क 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड लगभग स्थिर रही और 6.82 प्रतिशत के आसपास कारोबार कर रही थी। निवेशक Reserve Bank of India (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के मिनट्स का इंतजार कर रहे हैं, जबकि बढ़ती ब्रेंट क्रूड कीमतों ने जोखिम की भावना को बढ़ा दिया है।
यील्ड का हाल
10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 6.8223 प्रतिशत पर कारोबार कर रही थी, जो पिछले सत्र के बंद स्तर 6.8269 प्रतिशत के करीब है। बाजार में कारोबारी मात्रा कम रही क्योंकि व्यापारी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। ज्यादातर निवेशक 20 अगस्त को जारी होने वाले आरबीआई के मिनट्स का इंतजार कर रहे हैं, जिसमें महंगाई और विकास केoutlook पर महत्वपूर्ण संकेत मिल सकते हैं।
ब्रेंट क्रूड पर फोकस
बाजार की मुख्य चिंता बढ़ती तेल कीमतें हैं। ब्रेंट क्रूड 92 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा है और लगातार चौथे दिन चढ़ा है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की संभावनाएं कमजोर पड़ने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता ने आपूर्ति जोखिम बढ़ा दिए हैं।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का करीब 85 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में तेल कीमतों में तेज उछाल से आयात बिल बढ़ सकता है और चालू खाता घाटा प्रभावित हो सकता है। इससे मुद्रास्फीति पर भी दबाव बनने की आशंका है, जो बॉन्ड यील्ड के लिए नकारात्मक कारक माना जाता है।
अन्य कारक
आरबीआई ने विदेशी मुद्रा गैर-निवासी बैंक (FCNR-B) जमा के लिए स्वैप विंडो को समय से पहले 31 अगस्त को बंद करने का फैसला किया है (पहले यह 30 सितंबर तक थी)। इस कदम ने भी बाजार में सतर्कता बढ़ाई है।
रुपया भी कमजोर रहा और 95.71 प्रति डॉलर पर खुला, जबकि पिछले सत्र में यह 95.68 पर बंद हुआ था।
बाजार का रुख
व्यापारी फिलहाल किनारे पर खड़े हैं। आरबीआई के मिनट्स में महंगाई के रुख, विकास अनुमान और भविष्य की नीति संभावनाओं पर क्या कहा गया है, यह यील्ड की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। अगर मिनट्स में महंगाई को लेकर चिंता जताई गई या दरों में नरमी की संभावना कम बताई गई तो यील्ड पर दबाव बढ़ सकता है।
तेल कीमतों में निरंतर तेजी भी बॉन्ड बाजार के लिए चुनौती बनी हुई है। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होने या होर्मुज से शिपिंग सामान्य होने पर राहत मिल सकती है।
अर्थव्यवस्था पर असर
बॉन्ड यील्ड स्थिर रहने से सरकार की उधारी लागत में तत्काल कोई बड़ा बदलाव नहीं दिख रहा। लेकिन तेल कीमतों में बढ़ोतरी लंबे समय तक बनी रही तो मुद्रास्फीति और राजकोषीय गणित दोनों प्रभावित हो सकते हैं। इससे आरबीआई की नीतिगत राह भी प्रभावित हो सकती है।
बैंक, म्यूचुअल फंड और बीमा कंपनियां जैसे बड़े निवेशक अभी सावधानी से आगे बढ़ रहे हैं। नई गाइडेंस मिलने के बाद ही सक्रियता बढ़ने की उम्मीद है।
निष्कर्ष
भारतीय बॉन्ड बाजार फिलहाल इंतजार की मुद्रा में है। 10-वर्षीय यील्ड 6.82 प्रतिशत पर स्थिर रहने के पीछे आरबीआई मिनट्स का इंतजार और बढ़ती ब्रेंट क्रूड कीमतें मुख्य कारण हैं। तेल बाजार में अनिश्चितता बनी रहने तक सतर्कता का रुख जारी रह सकता है। निवेशक 20 अगस्त को जारी होने वाले मिनट्स पर बारीकी से नजर रखेंगे, जो निकट भविष्य में यील्ड की दिशा तय करेंगे।