Anthropic Effect: अमेरिकी टेक शेयरों में भारी गिरावट, भारतीय IT ADRs भी 5-10% टूटे
नई दिल्ली: अमेरिकी टेक और सॉफ्टवेयर सेक्टर में मंगलवार को जबरदस्त बिकवाली देखी गई, जिसे बाजार में अब “Anthropic Effect” का नाम दिया जा रहा है। Anthropic ने अपने Claude AI के लिए एक नया AI-पावर्ड लीगल प्लगइन लॉन्च किया है, जिसके बाद लीगल और कम्प्लायंस से जुड़े कामों में AI के बढ़ते दखल की आशंका से निवेशकों में दहशत फैल गई।
इस एक घटना ने अमेरिकी और भारतीय दोनों बाजारों में भारी बिकवाली को ट्रिगर कर दिया।
अमेरिकी सॉफ्टवेयर स्टॉक्स में भारी गिरावट
- Accenture: -9.6%
- Cognizant: -10.3%
- Gartner: -21%
- EPAM: -13%
- Globant: -12%
- Adobe: -7.3%
- Salesforce: -7%
- Microsoft: -2.8%
कुल मिलाकर सॉफ्टवेयर, फाइनेंशियल सर्विसेज और एसेट मैनेजमेंट से जुड़े स्टॉक्स में $285 बिलियन (लगभग ₹23.8 लाख करोड़) का सेल-ऑफ देखा गया।
भारतीय IT ADRs पर भी गहरा असर
- Infosys ADR: -5.6%
- Wipro ADR: -4.8%
भारतीय समयानुसार मंगलवार देर रात और बुधवार सुबह तक यह गिरावट घरेलू बाजार में भी दिख सकती है। TCS, Infosys, Wipro, Tech Mahindra, Persistent Systems और HCL Tech जैसे प्रमुख IT स्टॉक्स पर निवेशकों की नजर रहेगी।
आखिर हुआ क्या?
Anthropic ने Claude AI के लिए एक नया प्लगइन लॉन्च किया है जो खासतौर पर लीगल कामों के लिए डिज़ाइन किया गया है:
- कॉन्ट्रैक्ट रिव्यू
- कम्प्लायंस ट्रैकिंग
- रेगुलेशन एनालिसिस
- लीगल डॉक्यूमेंट्स की स्क्रीनिंग
सीधे शब्दों में: जो काम पहले बड़े वकीलों, लीगल फर्म्स और कुछ स्पेशलाइज्ड सॉफ्टवेयर कंपनियों के जरिए होता था, अब AI खुद तेजी से और सस्ते में करने लगा है।
बाजार को डर किस बात का?
- कई बड़ी IT कंपनियां लीगल प्रोसेस आउटसोर्सिंग (Legal Process Outsourcing – LPO) और कम्प्लायंस सर्विसेज से अच्छी कमाई करती हैं।
- अगर AI क्लाइंट्स को डायरेक्ट सॉल्यूशन देने लगे, तो IT कंपनियों की बिलिंग, मार्जिन और लॉन्ग-टर्म बिजनेस मॉडल पर गहरा असर पड़ सकता है।
- यही वजह है कि बाजार ने पहले ही IT स्टॉक्स में भारी बिकवाली शुरू कर दी।
आगे क्या?
- शॉर्ट टर्म: IT और सॉफ्टवेयर से जुड़े स्टॉक्स में वोलेटिलिटी और दबाव रह सकता है।
- लॉन्ग टर्म: सिर्फ वही IT कंपनियां मजबूत रहेंगी जो AI को अपने प्रोडक्ट्स का हिस्सा बना पाएंगी, न कि सिर्फ मैनपावर पर निर्भर रहेंगी।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट रिजल्ट्स की नहीं, बल्कि भविष्य के डर की है। जैसे-जैसे AI व्हाइट-कॉलर जॉब्स (लीगल, अकाउंटिंग, कंसल्टिंग) को छूएगा, बाजार सबसे पहले IT और सॉफ्टवेयर स्टॉक्स को निशाना बनाता है।
निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि शॉर्ट टर्म में सतर्क रहें और लॉन्ग टर्म में उन IT कंपनियों पर फोकस करें जो AI को अपने कोर बिजनेस में तेजी से इंटीग्रेट कर रही हैं।