एडिटर ओपिनियन: एमएसएमई पर जीएसटी 2.0 का प्रभाव

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जीएसटी 2.0 के लागू होने से माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। कर दरों में कमी और कंप्लायंस सरलीकरण ने लागत कम होगी , जिससे छोटे व्यवसायों को लाभ होगा । हालांकि, सेवा क्षेत्र के एमएसएमई अभी भी 20 लाख रुपये की पंजीकरण सीमा से जूझ रहे हैं, जो गुड्स क्षेत्र की तुलना में अ समान है। अगर सरकार सेवा क्षेत्र के लिए इस सीमा को 40 लाख रुपये तक बढ़ाए और गुड्स व सेवा दोनों क्षेत्रों के लिए इसे समान करे, तो यह क्रांतिकारी कदम होगा। इससे अधिक सर्विस प्रोवाइडर जीएसटी के दायरे से बाहर रह सकेंगे, कंप्लायंस का बोझ कम होगा और नए उद्यमियों को प्रोत्साहन मिलेगा। यह रोजगार सृजन को बढ़ाएगा, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में, जहां सेवा उद्योग तेजी से विकसित हो रहा है। समान सीमा से प्रतिस्पर्धा संतुलित होगी, और एमएसएमई को राष्ट्रीय बाजार में मजबूत स्थिति हासिल होगी। यह भारत की आर्थिक वृद्धि और आत्मनिर्भरता को और मजबूत करेगा, छोटे व्यवसायों को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

प्रदीप करम्बेलकर

फाउंडर & एडिटर

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