टैरिफ मुक्ति से निर्यात बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर; दोनों देशों के लिए win-win सौदा, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा
भारत और ब्रिटेन के बीच लंबे समय से लंबित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) आखिरकार 15 जुलाई 2026 से लागू होने जा रहा है। इस ऐतिहासिक समझौते से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को नया बढ़ावा मिलेगा और भारतीय निर्यातकों के लिए बड़े अवसर खुलेंगे।
FTA से क्या-क्या बदलेगा?
इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच ज्यादातर वस्तुओं पर टैरिफ (शुल्क) को काफी हद तक कम या खत्म कर दिया जाएगा। भारत से ब्रिटेन को होने वाले निर्यात में इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, इंजीनियरिंग गुड्स और कृषि उत्पादों पर टैरिफ में बड़ी राहत मिलेगी। वहीं ब्रिटेन से भारत आने वाले स्कॉच व्हिस्की, कार, मशीनरी और कॉस्मेटिक्स जैसे उत्पाद सस्ते हो जाएंगे।
भारतीय निर्यातकों को मिलेगा बड़ा फायदा
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, इस FTA से भारत के ब्रिटेन को निर्यात में 20-25% की बढ़ोतरी होने की संभावना है। खासतौर पर फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा होगा। ब्रिटेन भारतीय जेनेरिक दवाओं का बड़ा बाजार है और इस समझौते से भारतीय कंपनियों को प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिलेगी।
ब्रिटेन को भी क्या फायदा?
ब्रिटेन के लिए भारत एक बड़ा और तेजी से बढ़ता बाजार है। ब्रिटेन की कंपनियों को भारतीय बाजार में आसानी से प्रवेश मिलेगा। ब्रिटेन के हाई-टेक उत्पाद, ऑटोमोबाइल और वित्तीय सेवाओं को भारतीय उपभोक्ताओं तक पहुंचने में मदद मिलेगी।
सरकार का बयान
वाणिज्य मंत्री ने कहा, “यह समझौता भारत के आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देगा। इससे न केवल निर्यात बढ़ेगा बल्कि लाखों नए रोजगार भी पैदा होंगे।” ब्रिटेन के व्यापार मंत्री ने भी इसे दोनों देशों के लिए “win-win” सौदा बताया है।
चुनौतियां भी हैं
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय कंपनियों को गुणवत्ता मानकों, बौद्धिक संपदा अधिकार और प्रतिस्पर्धा के नए नियमों का पालन करना होगा। छोटे और मध्यम उद्यमों (MSME) को इस बदलाव के लिए तैयार रहना होगा।
बाजार की प्रतिक्रिया
समझौते की खबर सामने आते ही शेयर बाजार में संबंधित कंपनियों के शेयरों में तेजी देखी गई। निर्यातोन्मुखी सेक्टर में निवेशकों का उत्साह बढ़ा है।
आगे क्या?
15 जुलाई से FTA लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियां तेज होंगी। सरकार ने भारतीय निर्यातकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम और सहायता पैकेज की भी घोषणा की है।
यह समझौता भारत के वैश्विक व्यापारिक नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।