सचिन तेंदुलकर समर्थित स्पिनी ने ₹3,000 करोड़ तक के आईपीओ के गोपनीय कागजात दाखिल किए
यूज्ड-कार प्लेटफॉर्म वैल्यूड्राइव टेक्नोलॉजीज ने सेबी के पास कंफिडेंशियल फाइलिंग की; इश्यू फ्रेश कैपिटल और ओएफएस का मिश्रण संभव
क्रिकेट किंवदंती सचिन तेंदुलकर द्वारा समर्थित यूज्ड-कार मार्केटप्लेस स्पिनी ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए गोपनीय कागजात दाखिल कर दिए हैं। कंपनी ₹2,500 से 3,000 करोड़ तक जुटाने की योजना बना रही है। इश्यू में नई पूंजी और मौजूदा निवेशकों की ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) दोनों शामिल हो सकते हैं।
गोपनीय फाइलिंग क्या है
कंफिडेंशियल रूट से ड्राफ्ट पेपर्स दाखिल करने का मतलब है कि विस्तृत विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए जाते। सेबी समीक्षा के बाद जब रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस जारी होगा, तब कीमत बैंड, सटीक शेयर संख्या और आवंटन नियम सामने आएंगे। यह तरीका कंपनियों को बाजार का समय चुनने की सुविधा देता है।
अगस्त में पेरेंट कंपनी वैल्यूड्राइव टेक्नोलॉजीज को प्राइवेट लिमिटेड से पब्लिक लिमिटेड में बदला गया था। यही लिस्टिंग की तैयारी का औपचारिक कदम था।
कारोबार और आंकड़े
स्पिनी इस्तेमाल की गई कारों की खरीद-बिक्री का डिजिटल प्लेटफॉर्म है। यह कारों को खरीदकर रिफर्बिश करती है और फिर ग्राहकों को बेचती है। यह इन्वेंटरी-आधारित मॉडल पूंजी मांगता है, लेकिन राजस्व का आकार बड़ा दिखाता है।
संचालन से राजस्व वित्त वर्ष 2025 में 25 प्रतिशत बढ़कर ₹4,657 करोड़ रहा, जो वित्त वर्ष 2024 में ₹3,730 करोड़ था। वित्त वर्ष 2026 में टॉपलाइन करीब ₹6,000 करोड़ पहुंचने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2027 में और 25-30 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य बताया जा रहा है।
नुकसान कम हो रहा है, लेकिन कंपनी अभी मुनाफे में नहीं है। वित्त वर्ष 2025 में शुद्ध घाटा करीब ₹424 करोड़ रहा था। वित्त वर्ष 2026 में भी घाटा रहने का अनुमान है, हालांकि रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
निवेशक और वैल्यूएशन
स्पिनी अब तक करीब 780 मिलियन डॉलर जुटा चुकी है। टाइगर ग्लोबल और एक्सेल बड़े शेयरधारकों में शामिल हैं। दिसंबर 2021 में एडीक्यू, टाइगर ग्लोबल और एवेनिर ग्रोथ से 283 मिलियन डॉलर जुटाकर कंपनी यूनिकॉर्न बनी थी। तब वैल्यूएशन 1.8 अरब डॉलर था। हालिया राउंड के बाद वैल्यूएशन करीब 1.3 अरब डॉलर के आसपास बताया गया है।
सचिन तेंदुलकर कंपनी के निवेशकों में हैं। उनकी मौजूदगी ब्रांड को पहचान देती है, हालांकि कारोबार की असल परीक्षा यूज्ड-कार बाजार की प्रतिस्पर्धा और मुनाफे पर निर्भर करेगी।
बाजार और प्रतिस्पर्धा
भारत का यूज्ड-कार बाजार लाखों करोड़ का है। स्पिनी और कार्स24 जैसे प्लेटफॉर्म इस क्षेत्र में मुख्य दावेदार हैं। स्पिनी ने राजस्व में बढ़त बनाई है, जबकि प्रतिद्वंद्वी कुछ अलग मॉडल अपना रहे हैं। निवेशक आईपीओ में देखेंगे कि इन्वेंटरी मॉडल से स्थायी मुनाफा निकलेगा या नहीं।
आईपीओ से पूंजी का उपयोग
फ्रेश इश्यू की रकम आमतौर पर कार्यशील पूंजी, नेटवर्क विस्तार, टेक्नोलॉजी और कर्ज चुकाने में लगती है। ओएफएस से पुराने निवेशकों को आंशिक निकासी का मौका मिलेगा। सटीक उपयोग सेबी दस्तावेज सार्वजनिक होने पर पता चलेगा।
मॉर्गन स्टैनली, कोटक महिंद्रा कैपिटल और सिटी जैसे बैंक पहले सलाहकार के रूप में जुड़े बताए गए हैं।
निवेशकों के लिए संकेत
यूज्ड-कार कारोबार चक्रीय होता है। ब्याज दरें, नए वाहनों की कीमत और वित्त उपलब्धता बिक्री प्रभावित करती हैं। राजस्व बढ़ना सकारात्मक है, लेकिन घाटे वाली कंपनी का वैल्यूएशन बाजार की जोखिम क्षमता पर निर्भर करेगा। गोपनीय फाइलिंग के बाद लिस्टिंग की तारीख अभी तय नहीं है।
निष्कर्ष
स्पिनी का सेबी के पास गोपनीय आईपीओ आवेदन भारतीय स्टार्टअप बाजार में एक और बड़ी लिस्टिंग की तैयारी है। ₹3,000 करोड़ तक का इश्यू, बढ़ता राजस्व और तेंदुलकर जैसी पहचान ध्यान खींचेंगे। असल परीक्षा तब होगी जब घाटा मुनाफे में बदले और यूज्ड-कार बाजार में हिस्सेदारी टिके। फिलहाल यह कदम कंपनी को सार्वजनिक बाजार के दरवाजे तक ले आता है।