छोटे उद्योगों को मिला बड़ा सहारा: ढाई साल में ₹3,723 करोड़ इंसेंटिव, पिछले ढाई साल से तीन गुना ज्यादा
MSME सेक्टर में तेजी से बढ़ोतरी, रोजगार और उत्पादन में उछाल; सरकार की नीतियों से छोटे उद्यमियों को नई ताकत
देश के छोटे उद्योगों (MSME) को सरकार की नीतियों से बड़ा सहारा मिल रहा है। पिछले ढाई साल में छोटे उद्योगों को ₹3,723 करोड़ का इंसेंटिव दिया गया है। यह पिछले ढाई साल के मुकाबले तीन गुना ज्यादा है। इस बढ़ोतरी से MSME सेक्टर में उत्पादन, रोजगार और निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
इंसेंटिव में जबरदस्त बढ़ोतरी
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2023 से सितंबर 2025 तक छोटे उद्योगों को कुल ₹3,723 करोड़ का इंसेंटिव मिला। जबकि इससे पहले के ढाई साल (अक्टूबर 2020 से मार्च 2023) में यह आंकड़ा मात्र ₹1,241 करोड़ था। यानी इंसेंटिव में लगभग तीन गुना की वृद्धि हुई है।
मुख्य योजनाएं जिनसे मिला सहारा
इस बढ़ोतरी के पीछे सरकार की कई योजनाएं काम कर रही हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
- प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम का MSME के लिए विस्तार
- क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (CGTMSE)
- एमएसएमई चैंपियंस स्कीम
MSME सेक्टर पर सकारात्मक असर
इस बढ़े हुए इंसेंटिव से छोटे उद्योगों में:
- उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई
- नए रोजगार पैदा हुए
- निर्यात में सुधार हुआ
- तकनीकी उन्नयन को बढ़ावा मिला
MSME सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। यह देश के कुल रोजगार में लगभग 40% और GDP में करीब 30% का योगदान देता है।
छोटे उद्यमियों को राहत
छोटे उद्यमी लंबे समय से इंसेंटिव और आसान क्रेडिट की मांग कर रहे थे। सरकार के इस कदम से उन्हें नई उम्मीद मिली है। कई उद्यमियों का कहना है कि इंसेंटिव मिलने से उनकी इकाइयों का विस्तार करना आसान हो गया है और प्रतिस्पर्धा में टिके रहना संभव हुआ है।
सरकार का लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य MSME सेक्टर को और मजबूत करना है ताकि देश में मैन्युफैक्चरिंग बढ़े और रोजगार के अवसर पैदा हों। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम कर रही हैं।
आगे क्या?
अगले कुछ वर्षों में MSME सेक्टर को और अधिक इंसेंटिव और सुविधाएं मिलने की संभावना है। सरकार डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत छोटे उद्योगों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने पर जोर दे रही है।
नोट: इंसेंटिव आंकड़े उद्योग मंत्रालय और संबंधित विभागों द्वारा जारी आंकड़ों पर आधारित हैं।