भारत का डीपटेक और एआई दुनिया का सबसे अंडरप्राइस्ड एसेट क्लास: क्रेन वेंचर पार्टनर्स
ग्लोबल वीसी फर्म का दावा- कम पूंजी में बड़े नतीजे देने की क्षमता; टैलेंट, कैपिटल एफिशिएंसी और महत्वाकांक्षी फाउंडर्स को बताया बड़ा फायदा
ग्लोबल वेंचर कैपिटल फर्म क्रेन वेंचर पार्टनर्स ने भारत के डीपटेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सेक्टर को दुनिया का सबसे ज्यादा अंडरप्राइस्ड यानी कम आंका गया एसेट क्लास बताया है। फर्म के सह-संस्थापक और पार्टनर स्कॉट सेज ने कहा कि भारत में अपेक्षाकृत कम पूंजी लगाकर बड़े पैमाने पर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं, जो अमेरिका या यूरोप की तुलना में कहीं बेहतर अवसर प्रदान करता है।
क्या कहा क्रेन वेंचर ने?
स्कॉट सेज ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “भारत का डीपटेक और एआई शायद दुनिया का सबसे मिस्प्राइस्ड एसेट क्लास है।” उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी के पास 100 मिलियन डॉलर निवेश करने हैं तो बेहतर अवसर कहां मिलेगा—अमेरिका, यूरोप या भारत के डीपटेक में? उनका जवाब साफ था कि भारत में कैपिटल एफिशिएंसी बहुत अधिक है।
क्रेन का मानना है कि यह अंडरवैल्यूएशन सिर्फ स्टार्टअप्स के कम वैल्यूएशन तक सीमित नहीं है। असल बात यह है कि यहां छोटे निवेश से बड़े ग्लोबल स्तर के नतीजे निकाले जा सकते हैं, जबकि सिलिकॉन वैली में समान परिणाम के लिए भारी-भरकम फंडिंग राउंड की जरूरत पड़ती है।
क्यों है भारत खास?
फर्म ने तीन प्रमुख कारण बताए:
- तकनीकी प्रतिभा की भरमार: भारत में उच्च गुणवत्ता वाले इंजीनियर और रिसर्च टैलेंट उपलब्ध हैं।
- पूंजी की कुशलता: कम संसाधनों में ज्यादा काम हो रहा है।
- ** महत्वाकांक्षी फाउंडर्स**: अब भारतीय उद्यमी सिर्फ पश्चिमी मॉडल की नकल नहीं कर रहे, बल्कि शुरुआत से ही ग्लोबल स्तर के डिफरेंशिएटेड तकनीकी उत्पाद बना रहे हैं।
क्रेन मुख्य रूप से हार्ड डीपटेक (जिसमें उसके हालिया निवेश का 35-40 प्रतिशत जाता है), वर्टिकल एआई एप्लिकेशंस, सेमीकंडक्टर्स, रोबोटिक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों पर फोकस कर रहा है। फर्म का मानना है कि तकनीकी जटिलता वाले इन क्षेत्रों में एंट्री बैरियर ऊंचा होने से लंबे समय तक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बनी रहती है।
निवेश रणनीति
क्रेन मुख्य रूप से सीड स्टेज पर निवेश करता है। आमतौर पर पहली चेक 20-30 लाख डॉलर की होती है, जो शुरुआती स्तर पर 5 लाख डॉलर से लेकर 60 लाख डॉलर तक हो सकती है। फर्म सीरीज ए में भी भाग ले सकती है।
उसका 150 मिलियन डॉलर का एपीएसी फंड (सितंबर 2025 में लॉन्च) भारत पर भारी फोकस के साथ काम कर रहा है। अनुमान है कि फंड का 75-80 प्रतिशत हिस्सा (लगभग 100-120 मिलियन डॉलर) भारत में लगाया जाएगा। अगले 2-2.5 साल में 30-35 कंपनियों के पोर्टफोलियो का लक्ष्य है। फर्म ने पिछले 6-8 महीनों में 9-10 निवेश पहले ही कर दिए हैं।
ग्लोबल नेटवर्क का फायदा
क्रेन अपने पोर्टफोलियो कंपनियों को विदेश में निवेशक, ग्राहक और पार्टनर Dilane में मदद करता है। भारत को वह अपने एपीएसी रणनीति का टेस्टिंग ग्राउंड मानता है। आगे चलकर वह और एलपी जोड़ने की योजना बना रहा है।
बाजार के लिए मायने
यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत में डीपटेक और एआई स्टार्टअप्स के लिए सीड और सीरीज ए फंडिंग बढ़ रही है, लेकिन लेटर स्टेज कैपिटल अभी भी चुनौती बनी हुई है। क्रेन का आकलन बताता है कि ग्लोबल निवेशक अब भारत को सिर्फ सॉफ्टवेयर सर्विसेज या कंज्यूमर इंटरनेट का बाजार नहीं, बल्कि हार्ड टेक्नोलॉजी का महत्वपूर्ण केंद्र मानने लगे हैं।
सेमीकंडक्टर, एडवांस्ड एआई आर्किटेक्चर, रोबोटिक्स और सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में भारतीय कंपनियां धीरे-धीरे ग्लोबल सप्लाई चेन का हिस्सा बन रही हैं। कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाला नवाचार भारत की सबसे बड़ी ताकत है।
आगे की राह
क्रेन वेंचर पार्टनर्स का यह रुख अन्य ग्लोबल वीसी फर्म्स के लिए भी संकेत है। अगर भारत में डीपटेक और एआई को लेकर यह धारणा मजबूत होती है तो आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर विदेशी पूंजी आने की संभावना है। साथ ही, घरेलू फंड्स और सरकार की नीतियां भी इस सेक्टर को और मजबूत बना सकती हैं।
निष्कर्ष
क्रेन वेंचर पार्टनर्स का साफ संदेश है कि भारत का डीपटेक और एआई सेक्टर अभी ग्लोबल स्तर पर सबसे आकर्षक और कम आंके गए अवसरों में से एक है। टैलेंट, कैपिटल एफिशिएंसी और ग्लोबल महत्वाकांक्षा का मिश्रण इसे खास बनाता है। अगर यह आकलन सही साबित होता है तो आने वाले साल भारत के लिए डीपटेक क्रांति के साल साबित हो सकते हैं। निवेशकों और उद्यमियों दोनों के लिए यह सकारात्मक संकेत है।