दिसंबर 2025 में पहली बार 90 के पार गया था; FII बिकवाली, तेल की कीमतें और वैश्विक तनाव ने बढ़ाया दबाव, आम आदमी की जेब पर असर
भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले ऑल-टाइम लो पर पहुंच गया है। शुक्रवार को रुपया ₹96.14 के स्तर पर बंद हुआ, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। दिसंबर 2025 में पहली बार रुपया 90 के स्तर को पार कर चुका था, और अब यह 96 के पार पहुंचकर नई मिसाल कायम कर चुका है।
रुपया क्यों गिरा?
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली, अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और वैश्विक बाजार में जोखिम से बचाव (Risk Aversion) ने रुपए पर भारी दबाव डाला है। 2026 में अब तक FII ने भारतीय बाजार से ₹2 लाख करोड़ से ज्यादा की बिकवाली की है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ गई है।
RBI ने बाजार में हस्तक्षेप कर रुपए को संभालने की कोशिश की, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता के आगे यह पर्याप्त नहीं साबित हुआ।
महंगाई का खतरा
रुपए के कमजोर होने से आयातित महंगाई बढ़ने का खतरा है। भारत कच्चे तेल, खाद्य तेल, सोना और इलेक्ट्रॉनिक्स का बड़ा आयातक है। रुपए के हर ₹1 कमजोर होने से आयात बिल में हजारों करोड़ रुपये का इजाफा होता है।
विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर रुपया इसी स्तर पर बना रहा तो पेट्रोल-डीजल, खाने-पीने की चीजें और अन्य आयातित वस्तुएं और महंगी हो सकती हैं। पहले से ही रिटेल महंगाई 3.48% और थोक महंगाई 6% के आसपास है, ऐसे में यह और बढ़ सकती है।
आम आदमी पर असर
- पेट्रोल-डीजल महंगा होने से परिवहन और खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ेंगी।
- विदेश यात्रा, शिक्षा और इलाज महंगा होगा।
- मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित होगा।
RBI और सरकार की प्रतिक्रिया
RBI ने कहा है कि वह स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर और कदम उठाएगा। सरकार भी निर्यात बढ़ाने, आयात कम करने और विदेशी निवेश आकर्षित करने पर जोर दे रही है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक तनाव कम होता है और FII वापस आते हैं तो रुपया संभल सकता है। लेकिन अगर तेल की कीमतें और बढ़ीं या FII बिकवाली जारी रही, तो रुपया 97 के स्तर को भी पार कर सकता है।
अभी के लिए बाजार में सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है।