मध्य प्रदेश में आज बिजनेस-रेडी डिस्ट्रिक्ट्स वर्कशॉप, ईओडीबी सुधारों पर होगी चर्चा
भोपाल और रायसेन जिलों के लिए डी-बीआरएपी 2025 व बीआरएपी 2026 रोडमैप पर मंथन; सहयोगी शासन और निवेशक सुविधा पर फोकस
मध्य प्रदेश में कारोबार सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) को जिला स्तर तक मजबूत बनाने के उद्देश्य से आज भोपाल में महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। “बिल्डिंग बिजनेस-रेडी डिस्ट्रिक्ट्स: मध्य प्रदेश की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधार यात्रा और बीआरएपी रोडमैप” विषय पर आयोजित इस वर्कशॉप में राज्य और जिला स्तर पर सुधारों को तेज करने की रणनीति पर विस्तृत चर्चा होगी।
कार्यशाला का आयोजन एमपीआईडीसी (मध्य प्रदेश इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) द्वारा डेलॉयट ईओडीबी टीम के सहयोग से कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र / मिंटो हॉल, भोपाल में किया जा रहा है। इसमें भोपाल और रायसेन जिले के अधिकारी, औद्योगिक संघों के प्रतिनिधि, बीआरएपी नोडल अधिकारी और उद्योगपति शामिल होंगे।
वर्कशॉप का उद्देश्य
मध्य प्रदेश सरकार जिलों को निवेश के लिए पूरी तरह तैयार बनाने पर जोर दे रही है। इस दिशा में डिस्ट्रिक्ट बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान (डी-बीआरएपी) 2025 और राज्य स्तर के बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान (बीआरएपी) 2026 को प्रभावी तरीके से लागू करने पर फोकस रहेगा।
अधिकारियों का कहना है कि अब सिर्फ नीतियां बनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जिला स्तर पर सेवाओं की डिलीवरी तेज करनी होगी, मंजूरी का समय घटाना होगा और निवेशकों की शिकायतों का त्वरित निपटारा सुनिश्चित करना होगा।
सत्रों की रूपरेखा
प्रथम सत्र में सरकारी विभागों के अधिकारियों को डी-बीआरएप 2025 के फ्रेमवर्क, आकलन पद्धति, जिलों की भूमिका, साक्ष्य आवश्यकताओं और समय-सीमा के बारे में विस्तार से बताया जाएगा। बीआरएपी 2026 के तहत सुधार श्रेणियों, यूजर-स्पेसिफिक रिफॉर्म्स और विभागीय तैयारियों पर भी चर्चा होगी।
द्वितीय सत्र में उद्योगपतियों और औद्योगिक संघों को शामिल किया जाएगा। यहां मध्य प्रदेश की ईओडीबी सुधार यात्रा, इन्वेस्ट एमपी पोर्टल, डिजिटल गवर्नेंस, नियामकीय सुधार और 2026 के ईओडीबी अधिनियम पर प्रकाश डाला जाएगा।
दो महत्वपूर्ण पैनल चर्चाएं भी होंगी:
- बिजनेस-रेडी डिस्ट्रिक्ट्स: जिला प्रशासन की निवेशक सुविधा में भूमिका, अंतर-विभागीय समन्वय, मंजूरी समय कम करना, शिकायत निवारण और डिजिटल सेवा डिलीवरी।
- सहयोगी शासन: सरकार, उद्योग और निवेशकों के बीच साझेदारी, नियामकीय बाधाएं, निवेशक फीडबैक और भविष्य की सुधार प्राथमिकताएं।
पैनल में भोपाल और रायसेन के कलेक्टर, एमपीआईडीसी के अधिकारी, प्रमुख उद्योगपति, इन्वेस्ट इंडिया प्रतिनिधि और सीआईआई, फिक्की जैसे संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होने वाले हैं।
फोकस क्षेत्र
वर्कशॉप में नियामकीय सरलीकरण, डी-रेगुलेशन और डी-क्रिमिनलाइजेशन, जन विश्वास पहल, निवेशक सुविधा, डिजिटल गवर्नेंस और कुशल कार्यबल विकसित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। “स्टेकहोल्डर फीडबैक से सार्थक सुधार” की थीम के साथ सरकार उद्योग जगत की बात सुनकर नीतियां और अधिक व्यावहारिक बनाने का प्रयास करेगी।
महत्व
मध्य प्रदेश लगातार कारोबारी माहौल सुधारने की दिशा में काम कर रहा है। जिला स्तर पर सुधारों को मजबूत करने से न केवल निवेश आकर्षित होगा बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और औद्योगिक विकास को भी गति मिलेगी। समयबद्ध क्रियान्वयन और निरंतर निगरानी से राज्य को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में और आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कार्यशाला के समापन पर मुख्य बिंदुओं का सारांश प्रस्तुत किया जाएगा और जिलों के लिए एक्शन पॉइंट्स तय किए जाएंगे। इसके बाद लंच और नेटवर्किंग सेशन में सरकारी अधिकारियों तथा उद्योग प्रतिनिधियों के बीच अनौपचारिक चर्चा भी होगी।
मध्य प्रदेश सरकार का यह प्रयास निवेशकों के लिए अधिक अनुकूल, पारदर्शी और तेज सेवा तंत्र तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आज की कार्यशाला से जिला स्तर पर ठोस कार्ययोजना सामने आने की उम्मीद है।