जीएसटी 2.0 के बाद कार बिक्री 22% बढ़ी, मासिक 4 लाख यूनिट नया सामान्य बना
अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 तक थोक बिक्री 47.63 लाख यूनिट; यूटिलिटी वाहनों ने वृद्धि का तीन-चौथाई हिस्सा दिया
भारत के पैसेंजर व्हीकल बाजार ने जीएसटी 2.0 लागू होने के बाद नई रफ्तार पकड़ी है। अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 तक घरेलू थोक बिक्री 22.28 प्रतिशत बढ़कर 47,63,285 यूनिट पहुंच गई, जो एक साल पहले इसी अवधि में 38,95,262 यूनिट थी। यानी करीब 8.68 लाख अतिरिक्त वाहन बिके।
औसत मासिक थोक बिक्री 4,33,026 यूनिट रही, जबकि पिछले साल यह 3,54,114 यूनिट थी। जीएसटी 2.0 (22 सितंबर 2025 से प्रभावी) के बाद के 11 महीनों में से नौ में बिक्री 4 लाख यूनिट के पार गई। उससे पहले के साल में एक भी महीना इस स्तर पर नहीं पहुंचा था। चार लाख मासिक बाजार अब अपवाद नहीं, सामान्य लगने लगा है।
टैक्स कटौती से सस्ती हुई कारें
नई कर व्यवस्था ने कीमतों पर सीधा असर डाला। छोटी पेट्रोल, एलपीजी और सीएनजी कारें (1200 सीसी तक और 4 मीटर तक) पर जीएसटी 18 प्रतिशत रह गया। मिड-साइज और बड़ी कारों तथा योग्य यूटिलिटी वाहनों पर सेस हटाकर फ्लैट 40 प्रतिशत कर तय हुआ। छोटी डीजल कारों पर प्रभावी दर करीब 31 प्रतिशत रही। बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों पर 5 प्रतिशत कर जारी रहा।
इससे एंट्री और मिड सेगमेंट खरीदना आसान हुआ। कंपनियों ने कहा कि कर लाभ ग्राहकों तक पहुंचाया गया। सस्ते वित्त, नए मॉडल और त्योहारी मांग ने भी बिक्री बढ़ाई।
यूवी ने संभाली कमान
यूटिलिटी वाहन सबसे बड़े ग्रोथ इंजन बने। उनकी बिक्री 24.69 प्रतिशत बढ़कर 31,12,650 यूनिट हो गई। कुल बढ़ोतरी का 75 प्रतिशत हिस्सा यूवी से आया। यात्री कारें 15.71 प्रतिशत बढ़कर 13,68,853 यूनिट रहीं। वैन सेगमेंट 13.67 प्रतिशत बढ़कर 1,53,918 यूनिट पर पहुंचा।
गौरतलब है कि यूवी नामप्लेट्स की संख्या यात्री कारों से कम है, फिर भी मांग यहीं केंद्रित रही। परिवार और रोड ट्रिप के लिए ऊंची गाड़ियों की पसंद मजबूत बनी हुई है।
कंपनियों का रुख
मारुति सुजुकी की पैसेंजर व्हीकल बिक्री अप्रैल-अगस्त 2026 में सालाना 36 प्रतिशत बढ़ी। एंट्री सेगमेंट में बढ़ोतरी 96 प्रतिशत से अधिक बताई गई, जिसका श्रेय सस्ती कीमतों को दिया गया।
महिंद्रा की एसयूवी बिक्री करीब 17 प्रतिशत बढ़ी और कंपनी क्षमता बढ़ाने पर काम कर रही है। टाटा मोटर्स ने कहा कि कर लाभ पूरा ग्राहकों को दिया गया। हुंडई के तरुण गर्ग के अनुसार सुधारों से सामर्थ्य और विश्वास बढ़ा है, इसलिए 4 लाख यूनिट मासिक अब नया मानक बन गया है।
क्या यह तेजी टिकेगी
चार लाख मासिक स्तर कई महीनों तक टिका रहना मांग के स्थायित्व का संकेत है। लेकिन आधार ऊंचा होने के बाद वृद्धि दर धीमी पड़ सकती है। ब्याज दरें, ग्रामीण आय, त्योहारों का कैलेंडर और नए मॉडल लॉन्च अगले कुछ तिमाहियों का रुख तय करेंगे।
इलेक्ट्रिक वाहनों पर कम कर बना हुआ है, फिर भी कुल बाजार में उनका हिस्सा अभी सीमित है। पारंपरिक पेट्रोल-सीएनजी और यूवी सेगमेंट ही वर्तमान उछाल के केंद्र हैं।
अर्थव्यवस्था के लिए संकेत
ऑटो क्षेत्र रोजगार, स्टील, टायर, वित्त और डीलर नेटवर्क से जुड़ा है। थोक बिक्री में 8.68 लाख यूनिट की बढ़ोतरी फैक्ट्री उपयोग और सहायक उद्योगों के लिए सकारात्मक है। साथ ही यह दिखाता है कि कर सरलीकरण का सीधा असर उपभोक्ता मांग पर पड़ सकता है।
नीति निर्माताओं के लिए संदेश साफ है: कीमत संवेदनशील बाजार में टैक्स ढांचा मांग बदल सकता है। कंपनियों के लिए संदेश यह है कि एंट्री और यूवी दोनों में क्षमता और सप्लाई तैयार रखनी होगी।
निष्कर्ष
जीएसटी 2.0 के बाद भारतीय कार बाजार ने 22 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की है और मासिक 4 लाख यूनिट का स्तर सामान्य बनता दिख रहा है। यूटिलिटी वाहनों की मांग इस कहानी की रीढ़ है। अब सवाल यह है कि यह रफ्तार कर लाभ के शुरुआती उत्साह के बाद भी बनी रहती है या नहीं। फिलहाल शोरूम और फैक्ट्रियां व्यस्त हैं, और चार लाख का आंकड़ा नई सामान्य लाइन बन चुका है।