देश का सबसे बड़ा आईपीओ एक घंटे में फुल सब्सक्राइब: जियो का मेगा इश्यू

2

₹30,188 करोड़ का ऑफर 21 अक्टूबर को खोला; मिनिमम ₹13,428 लगाना होगा, ग्रे मार्केट में 22% प्रीमियम का संकेत; 23 अक्टूबर तक बोली

रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और टेलीकॉम कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम बनकर उभरा है। इश्यू खुलते ही एक घंटे के अंदर पूरा सब्सक्राइब हो गया। दोपहर एक बजे तक कुल सब्सक्रिप्शन 1.64 गुना पहुंच गया। यह निवेशकों के भारी उत्साह का संकेत है।

सब्सक्रिप्शन का हाल

21 अक्टूबर को खुले इस आईपीओ में 19.75 करोड़ शेयरों के मुकाबले 32.41 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां आईं। योग्य संस्थागत निवेशकों (क्यूआईबी) ने अपना कोटा 4.86 गुना भर दिया। खुदरा निवेशकों की भागीदारी 46 प्रतिशत, कर्मचारियों की 99 प्रतिशत और रिलायंस शेयरधारकों की 87 प्रतिशत रही।

एंकर निवेशकों से पहले ही ₹8,110 करोड़ जुटाए जा चुके हैं। 19 अक्टूबर को 212 एंकर निवेशकों ने हिस्सा लिया और उनकी बोली 30 गुना से अधिक ओवरसब्सक्राइब रही। कुल बोलियां ₹2.5 लाख करोड़ तक पहुंचीं। इसमें ग्लोबल एसेट मैनेजर्स, सॉवरेन वेल्थ फंड्स, भारतीय म्यूचुअल फंड्स, बीमा कंपनियां और पेंशन फंड्स शामिल रहे। यह किसी भारतीय आईपीओ में सबसे बड़ा संस्थागत रुझान माना जा रहा है।

इश्यू की मुख्य बातें

जियो प्लेटफॉर्म्स 27 करोड़ शेयर जारी करके ₹30,188 करोड़ जुटा रही है। प्राइस बैंड ₹1,065 से ₹1,119 प्रति शेयर है। न्यूनतम निवेश ₹13,428 (एक लॉट) है। अधिकतम 14 लॉट यानी 168 शेयर तक आवेदन किया जा सकता है।

बोली 23 अक्टूबर 2026 तक खुली रहेगी। इश्यू पूरी तरह फ्रेश इश्यू है, यानी पैसा कंपनी को जाएगा। क्यूआईबी के लिए 50 प्रतिशत, एनआईआई के लिए 15 प्रतिशत और रिटेल के लिए 35 प्रतिशत रिजर्व है। कर्मचारियों के लिए ₹500 करोड़ का रिजर्वेशन है और उन्हें ₹54 प्रति शेयर का डिस्काउंट मिलेगा। रिलायंस के पात्र शेयरधारकों (14 अक्टूबर तक) के लिए ₹2,500 करोड़ का रिजर्वेशन है।

कंपनी और वैल्यूएशन

जियो भारत का सबसे बड़ा टेलीकॉम ऑपरेटर है। 30 जून 2026 तक उसके पास 53.3 करोड़ सब्सक्राइबर थे, जिनमें 28.49 करोड़ 5जी यूजर्स शामिल हैं। यह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा 5जी बेस है। कंपनी मुंबई मुख्यालय वाली है और रिलायंस इंडस्ट्रीज की टेक्नोलॉजी आर्म है। यह अन्य टेलीकॉम कंपनियों, एंटरप्राइज और प्राइवेट नेटवर्क्स को 5जी सेवाएं, सॉफ्टवेयर और एआई टूल्स भी देती है।

लिस्टिंग के बाद मार्केट कैप करीब ₹10.30 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है। प्रमोटर हिस्सेदारी 66.43 प्रतिशत से घटकर 64.48 प्रतिशत और पब्लिक होल्डिंग 33.57 प्रतिशत से बढ़कर 35.52 प्रतिशत हो जाएगी।

पैसा कहां जाएगा

जुटाई गई रकम का बड़ा हिस्सा सब्सिडियरी रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड (आरजेआईएल) के कर्ज चुकाने में लगेगा। बाकी जनरल कॉरपोरेट पर्पज के लिए रहेगा। सेबी ने 28 अगस्त 2026 को मंजूरी दी थी। डीआरएचपी 19 जून को और आरएचपी 14 अक्टूबर को दाखिल हुआ।

ग्रे मार्केट और रिटर्न का संकेत

ग्रे मार्केट प्रीमियम करीब ₹252 बताई जा रही है। ऊपरी बैंड ₹1,119 पर इससे लिस्टिंग करीब ₹1,371 पर हो सकती है। यह लगभग 22 प्रतिशत का संभावित रिटर्न है। ग्रे मार्केट आंकड़े अनौपचारिक हैं और बदलते रहते हैं। वास्तविक लिस्टिंग कीमत बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगी।

निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है

जियो का आईपीओ लंबे समय से प्रतीक्षित था। मजबूत सब्सक्रिप्शन, एंकर की भारी मांग और 5जी में नेतृत्व इसे निवेशकों के लिए आकर्षक बना रहे हैं। रिटेल निवेशकों के लिए न्यूनतम ₹13,428 का प्रवेश द्वार अपेक्षाकृत सुलभ है। रिलायंस शेयरधारकों को रिजर्व कोटा अतिरिक्त सुविधा देता है।

जोखिम भी है। टेलीकॉम क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा तीव्र है। कर्ज चुकाने से बैलेंस शीट मजबूत होगी, लेकिन विकास की रफ्तार और मार्जिन पर नजर रखनी होगी। लिस्टिंग के बाद शेयर की चाल एंकर और संस्थागत निवेशकों की होल्डिंग अवधि तथा बाजार के माहौल पर निर्भर करेगी।

निष्कर्ष

जियो प्लेटफॉर्म्स का ₹30,188 करोड़ का आईपीओ एक घंटे में फुल सब्सक्राइब होकर इतिहास रच रहा है। एंकर राउंड में रिकॉर्ड डिमांड और ग्रे मार्केट में 22 प्रतिशत प्रीमियम का संकेत उत्साह बढ़ा रहा है। बोली 23 अक्टूबर तक खुली है। न्यूनतम ₹13,428 लगाकर रिटेल निवेशक भी हिस्सा ले सकते हैं। यह भारत के डिजिटल और टेलीकॉम विकास की कहानी को सार्वजनिक बाजार से जोड़ने वाला बड़ा कदम है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.