खुदरा महंगाई लगातार सातवें महीने बढ़ी, जुलाई में 4.45% पर पहुंची
खाने-पीने की चीजें महंगी होने से दबाव; फूड इंफ्लेशन 5.52%, आरबीआई के 4% लक्ष्य से दूसरा महीना ऊपर
देश में खुदरा महंगाई लगातार सातवें महीने बढ़ गई है। जुलाई 2026 में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित महंगाई दर 4.45 प्रतिशत रही, जो जून के 4.38 प्रतिशत से अधिक है। खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से यह दबाव बना। यह लगातार दूसरा महीना है जब महंगाई आरबीआई के 4 प्रतिशत के मध्यम अवधि लक्ष्य से ऊपर रही है।
ताजा आंकड़े
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में साल-दर-साल खुदरा महंगाई 4.45 प्रतिशत दर्ज की गई। जून में यह 4.38 प्रतिशत थी। जनवरी 2026 से महंगाई में निरंतर वृद्धि का रुख बना हुआ है।
खाद्य महंगाई (Consumer Food Price Index) जुलाई में बढ़कर 5.52 प्रतिशत हो गई, जबकि जून में यह 5.32 प्रतिशत थी। ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई 5.79 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 5.05 प्रतिशत रही।
क्या महंगा हुआ?
खाने-पीने की कई वस्तुओं के दाम में तेजी आई। प्याज, लहसुन और अदरक जैसी चीजों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई। प्याज के दाम में 22.54 % तेज वृद्धि हुई, जिससे घरों के बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ा। अदरक और लहसुन में भी ऊंची महंगाई दर्ज की गई। हालांकि कुछ सब्जियों में राहत के संकेत भी रहे, लेकिन कुल मिलाकर खाद्य समूह ने महंगाई को ऊपर धकेला।
ईंधन और कुछ अन्य श्रेणियों में भी दबाव बना रहा, जिससे समग्र आंकड़ा बढ़ा।
ग्रामीण बनाम शहरी
ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई शहरी क्षेत्रों से अधिक रही। जुलाई में ग्रामीण खुदरा महंगाई 4.84 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि शहरी महंगाई 3.96 प्रतिशत पर सिमटी रही। ग्रामीण इलाकों में खाद्य पदार्थों की महंगाई का असर ज्यादा दिखता है क्योंकि वहां खपत बास्केट में खाने-पीने की हिस्सेदारी अधिक होती है।
आरबीआई के लक्ष्य से ऊपर
भारतीय रिजर्व बैंक महंगाई का मध्यम अवधि लक्ष्य 4 प्रतिशत रखता है, जिसमें 2 से 6 प्रतिशत की सहनशीलता सीमा है। जुलाई का आंकड़ा 4 प्रतिशत से ऊपर होने के बावजूद सहनशीलता सीमा के अंदर है। आरबीआई ने हालिया नीति में दरों को स्थिर रखा था और आगे महंगाई के रुख पर नजर रखने की बात कही थी।
खाद्य और ईंधन से प्रेरित महंगाई में सामान्यीकरण के सीमित संकेत हैं। कोर महंगाई अपेक्षाकृत नियंत्रित बताई जा रही है।
आम आदमी पर असर
महंगाई बढ़ने से खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के बजट पर दबाव बढ़ता है। सब्जियों और रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ने से मासिक खर्च में इजाफा होता है। लगातार सात महीने वृद्धि का रुख घरों की बचत क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
आगे की चुनौतियां
मानसून की प्रगति, खरीफ फसल की पैदावार और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल तथा खाद्य पदार्थों के दाम महंगाई के अगले रुख को तय करेंगे। अगर खाद्य आपूर्ति सामान्य रहती है तो आगे राहत मिल सकती है। वहीं, किसी व्यवधान की स्थिति में दबाव बना रह सकता है।
सरकार और आरबीआई दोनों आपूर्ति पक्ष के उपायों और मौद्रिक नीति के जरिए महंगाई को काबू में रखने का प्रयास करते हैं। बफर स्टॉक का इस्तेमाल, आयात में ढील और बाजार निगरानी जैसे कदम समय-समय पर उठाए जाते हैं।
निष्कर्ष
जुलाई में खुदरा महंगाई 4.45 प्रतिशत पर पहुंचकर लगातार सातवें महीने बढ़ी है। खाने-पीने की चीजों के महंगा होने से यह दबाव मुख्य रूप से बना। आरबीआई के 4 प्रतिशत लक्ष्य से ऊपर रहने के बावजूद आंकड़ा सहनशीलता सीमा में है। आने वाले महीनों में खाद्य मुद्रास्फीति का रुख और मानसून का प्रदर्शन महंगाई को दिशा देगा। आम उपभोक्ताओं के लिए रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम पर नजर रखना जारी रहेगा।