जनवरी में FII ने ₹25,000 करोड़ से ज्यादा निकाले, रुपया 91.98 पर पहुंचा; इंपोर्ट महंगे होने से महंगाई का खतरा, RBI इंटरवेंशन जारी
भारतीय रुपया लगातार कमजोर हो रहा है और अब यह 92 के स्तर के करीब पहुंच चुका है। आज इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 91.98 पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछले कई महीनों का सबसे निचला स्तर है। पिछले 10 ट्रेडिंग दिनों में रुपया 1.20 रुपये से ज्यादा गिर चुका है। इस गिरावट का मुख्य कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की भारी बिकवाली है, जिसने जनवरी के पहले 18 दिनों में ही भारतीय शेयर बाजार से ₹25,000 करोड़ से अधिक की निकासी की है।
FII बिकवाली का दबाव बरकरार
जनवरी 2026 में FII ने अब तक ₹25,000 करोड़ से ज्यादा की नेट बिकवाली की है। यह बिकवाली मुख्य रूप से निम्न कारणों से हो रही है:
- हाई वैल्यूएशन: निफ्टी का P/E रेशियो 24.5 के आसपास पहुंचा है, जो ऐतिहासिक औसत से काफी ऊपर है। FII इसे महंगा मानकर प्रॉफिट बुकिंग कर रहे हैं।
- कमजोर रुपया: रुपया पहले ही 91 के पार जा चुका है, जिससे डॉलर में रिटर्न प्रभावित हो रहा है। FII के लिए भारत में निवेश का रिटर्न कम हो रहा है।
- ग्लोबल अनिश्चितता: अमेरिकी फेड की ब्याज दरों पर अनिश्चितता, ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीतियां और चीन-अमेरिका ट्रेड टेंशन से जोखिम-ऑफ सेंटिमेंट बना हुआ है।
- ट्रेड डील में देरी: भारत-अमेरिका ट्रेड डील में अभी तक कोई बड़ा ब्रेकथ्रू नहीं हुआ है, जिससे FII सतर्क हैं।
बाजार पर असर: सेंसेक्स-निफ्टी में दबाव
जनवरी के पहले 18 दिनों में:
- सेंसेक्स 1,400 अंक से ज्यादा गिरा (85,800 से नीचे आया)
- निफ्टी 400 अंकों से अधिक गिरकर 25,700 के नीचे ट्रेड कर रहा है
- मिडकैप और स्मॉलकैप में 5-8% तक की गिरावट
हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने ₹20,000 करोड़ से अधिक की खरीदारी की है, जिसने गिरावट को कुछ हद तक कंट्रोल किया है।
अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
- इंपोर्ट महंगे: तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, गोल्ड और अन्य आयातित सामान की कीमतें बढ़ेंगी, जो महंगाई बढ़ा सकती है।
- निर्यातकों को फायदा: IT, टेक्सटाइल, फार्मा और इंजीनियरिंग गुड्स के निर्यातक डॉलर में ज्यादा कमाई करेंगे।
- RBI की स्थिति: RBI के पास $687 बिलियन के रिजर्व्स हैं, जो अभी भी मजबूत हैं। RBI लगातार इंटरवेंशन कर रहा है, लेकिन इस बार कम आक्रामक रहा है।
विशेषज्ञों की राय
- कोटक सिक्योरिटीज: “FII आउटफ्लो और रुपए की कमजोरी से शॉर्ट-टर्म में दबाव रहेगा। DII की खरीदारी से गिरावट सीमित रहेगी।”
- मोतीलाल ओसवाल: “ट्रेड डील में प्रगति और अच्छे Q3 नतीजे से रिवर्सल संभव है। बैंकिंग और IT में सतर्क रहें।”
- जेपी मॉर्गन: “भारत अभी भी उभरते बाजारों में आकर्षक है, लेकिन वैल्यूएशन कंट्रोल में आने तक FII सतर्क रहेंगे।”
निष्कर्ष
रुपये का 91.98 पर पहुंचना FII की बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितता का नतीजा है। इससे इंपोर्ट महंगे होंगे, लेकिन निर्यात को बूस्ट मिलेगा। RBI की इंटरवेंशन से अचानक क्रैश का खतरा कम है। निवेशक शॉर्ट-टर्म में सतर्क रहें और लॉन्ग-टर्म में मजबूत फंडामेंटल्स वाली कंपनियों पर फोकस करें। ट्रेड डील, FII फ्लो और कच्चे तेल के दाम पर नजर रखना जरूरी है। भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है, जो लंबे समय में रिकवरी सुनिश्चित करेगी।