रक्षा मंत्रालय ने ₹1 लाख करोड़ का परिवहन विमान टेंडर जारी किया, 60 मल्टीरोल एयरक्राफ्ट की खरीद
IAF के पुराने बेड़े को बदलने की बड़ी योजना; टाटा, महिंद्रा, HAL समेत भारतीय कंपनियां विदेशी भागीदारों के साथ दौड़ में, मेक इन इंडिया को बढ़ावा
नई दिल्ली | 14 अगस्त 2026 अंकित जैन, रक्षा डेस्क
रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए 60 मल्टीरोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की खरीद हेतु करीब ₹1 लाख करोड़ का टेंडर जारी किया है। यह टेंडर पुराने परिवहन विमानों को बदलने और रणनीतिक एयरलिफ्ट क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। टेंडर कई भारतीय कंपनियों को जारी किया गया है, जिनमें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, महिंद्रा डिफेंस समेत अन्य निजी क्षेत्र की कंपनियां शामिल हैं।
टेंडर की मुख्य बातें
इस कार्यक्रम के तहत लगभग 60 मध्यम परिवहन विमान खरीदे जाएंगे। इनकी कार्गो क्षमता 18 से 30 टन के बीच होने की उम्मीद है। योजना के अनुसार करीब 20 प्रतिशत विमान फ्लाई-अवे कंडीशन में आएंगे, जबकि शेष भारत में निर्मित किए जाएंगे। घरेलू उत्पादन में 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का लक्ष्य रखा गया है।
यह कार्यक्रम भारतीय कंपनियों के नेतृत्व में चलेगा। वे वैश्विक मूल उपकरण निर्माताओं (OEM) के साथ साझेदारी कर भारत में विनिर्माण और असेंबली लाइन स्थापित करेंगे।
प्रमुख दावेदार और साझेदारियां
- टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स ने अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन के साथ साझेदारी की है। वे C-130J सुपर हरक्यूलिस की पेशकश कर रहे हैं, जो पहले से IAF में विशेष अभियानों के लिए शामिल है।
- महिंद्रा डिफेंस ने ब्राजील की एम्ब्रेयर के साथ करार किया है और C-390 मिलेनियम विमान का प्रस्ताव रखा है।
- HAL भी इस दौड़ में शामिल है और विदेशी साझेदार के साथ बोली लगाएगी।
- कुछ रिपोर्ट्स में अडानी डिफेंस और रिलायंस डिफेंस का भी जिक्र है।
रणनीतिक महत्व
IAF का वर्तमान परिवहन बेड़ा पुराना हो चुका है। सोवियत मूल के An-32 विमान लंबे समय से सेवा में हैं। नए मल्टीरोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट सैनिकों, उपकरणों और रसद को तेजी से दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचाने में मदद करेंगे। इन विमानों को एयरियल रिफ्यूलिंग जैसी भूमिकाओं के लिए भी कॉन्फ़िगर किया जा सकता है।
यह सौदा मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूत करेगा। घरेलू एयरोस्पेस इकोसिस्टम, रोजगार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा मिलेगा।
किन भारतीय शेयरों को फायदा हो सकता है?
इस बड़े टेंडर से रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र की कंपनियों को लाभ होने की संभावना है:
- हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL): टेंडर में सीधे शामिल होने और संभावित विनिर्माण भूमिका के कारण सबसे प्रमुख लाभार्थी।
- महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M): महिंद्रा डिफेंस के जरिए C-390 की बोली लगा रही है। सफल होने पर ग्रुप को बड़ा ऑर्डर मिल सकता है।
- टाटा समूह से जुड़ी कंपनियां: टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स निजी है, लेकिन सफल साझेदारी से पूरे समूह और संबंधित सप्लायर्स को सकारात्मक धारणा का लाभ मिल सकता है।
- अन्य रक्षा शेयर जैसे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL), भारत डायनेमिक्स और एयरोस्पेस कंपोनेंट निर्माता भी सप्लाई चेन के जरिए लाभान्वित हो सकते हैं।
- यदि अडानी या रिलायंस डिफेंस आगे बढ़ते हैं तो संबंधित सूचीबद्ध कंपनियों पर भी नजर रहेगी।
बड़े रक्षा ऑर्डर की खबर से समग्र डिफेंस इंडेक्स और संबंधित शेयरों में सकारात्मक मूड बनने की संभावना रहती है।
आगे की प्रक्रिया
टेंडर जारी होने के बाद कंपनियां तकनीकी और वाणिज्यिक प्रस्ताव जमा करेंगी। फील्ड ट्रायल, मूल्यांकन और बातचीत के बाद अंतिम अनुबंध तय होगा। यह प्रक्रिया समय ले सकती है, लेकिन कार्यक्रम के आकार को देखते हुए यह आने वाले वर्षों का एक प्रमुख रक्षा सौदा साबित होगा।
निष्कर्ष
रक्षा मंत्रालय का ₹1 लाख करोड़ का परिवहन विमान टेंडर भारतीय वायुसेना की क्षमता बढ़ाने और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने वाला महत्वपूर्ण कदम है। HAL, महिंद्रा और टाटा जैसी कंपनियां विदेशी साझेदारों के साथ प्रतिस्पर्धा में हैं। सफल बोली लगाने वाली कंपनी को दीर्घकालिक ऑर्डर और प्रौद्योगिकी लाभ मिलेगा, जबकि संबंधित शेयरों को बाजार में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने की उम्मीद है। मेक इन इंडिया के तहत यह कार्यक्रम भारतीय रक्षा उद्योग के लिए नई संभावनाएं खोलता है।