भारत ने परमाणु क्षेत्र को साबित विदेशी तकनीक के लिए खोला, सख्त नियामकीय निगरानी के साथ

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SHANTI अधिनियम के मसौदा नियमों में प्राइवेट और विदेशी निवेश की अनुमति; केवल प्रमाणित और परिचालित रिएक्टर डिजाइन ही पात्र, रेगुलेटर किसी भी चरण में रोक सकता है

भारत ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को प्राइवेट और विदेशी भागीदारी के लिए और अधिक खोलते हुए साबित विदेशी रिएक्टर तकनीक को अनुमति देने का प्रस्ताव रखा है। परमाणु ऊर्जा विभाग द्वारा जारी मसौदा नियमों के अनुसार, केवल वे विदेशी डिजाइन ही पात्र होंगे जिनका मूल देश में या किसी अन्य देश में पहले से परिचालन का प्रमाणित रिकॉर्ड हो। साथ ही पूरी परियोजना पर सख्त चरणबद्ध नियामकीय निगरानी रहेगी।

मसौदा नियमों की मुख्य बातें

14 अगस्त 2026 को जारी ड्राफ्ट रूल्स और रेगुलेशंस के तहत प्राइवेट कंपनियां परमाणु बिजली संयंत्र बना सकती हैं, उनका संचालन कर सकती हैं और डीकमीशन भी कर सकती हैं। विदेशी तकनीक के लिए शर्तें साफ हैं:

  • रिएक्टर डिजाइन को मूल देश के नियामक प्राधिकरण से प्रमाणित या स्वीकृत होना चाहिए।
  • वह रिएक्टर मूल देश या किसी अन्य विदेशी देश में पहले से परिचालित होना चाहिए।
  • तकनीक प्रदाता को डिजाइन सपोर्ट, अनुमतियां और दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे।

केवल “कंट्री ऑफ ओरिजिन” की तकनीक ही मान्य होगी, यानी वे देश जो परमाणु रिएक्टर डिजाइन और सप्लाई चेन में आत्मनिर्भर हों तथा जिनकी नियामकीय मंजूरी वैश्विक स्तर पर भरोसेमंद हो।

चरणबद्ध मंजूरी और नियंत्रण

कंपनियां पहले इन-प्रिंसिपल अप्रूवल ले सकती हैं। इससे वे वेंडरों से बातचीत, भूमि अधिग्रहण और प्रारंभिक काम शुरू कर सकेंगी। औपचारिक लाइसेंस के बाद डिजाइन, साइट चयन, निर्माण, कमीशनिंग और संचालन के हर चरण पर नियामक जांच होगी। अगर सुरक्षा या अन्य शर्तें पूरी नहीं होतीं तो रेगुलेटर किसी भी महत्वपूर्ण पड़ाव पर परियोजना रोक सकता है।

यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि सुरक्षा पर कोई समझौता न हो और सरकार का नियंत्रण बना रहे।

SHANTI अधिनियम का महत्व

ये मसौदा नियम सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) अधिनियम, 2025 के तहत आए हैं। इस कानून ने दशकों पुराने राज्य एकाधिकार को समाप्त किया और प्राइवेट तथा सीमित विदेशी निवेश की राह खोली। आपूर्तिकर्ताओं की देनदारी को सीमित करने जैसे बदलाव भी किए गए थे, जो लंबे समय से निवेशकों की चिंता का विषय था।

ऊर्जा लक्ष्य और संभावनाएं

भारत का लक्ष्य 2047 तक परमाणु बिजली क्षमता को 100 गीगावॉट तक पहुंचाना है। वर्तमान क्षमता करीब 8-9 गीगावॉट के आसपास है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर इस दशक में पांच नए परमाणु रिएक्टर शुरू करने का उल्लेख किया था। प्राइवेट और विदेशी तकनीक की अनुमति से इस लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

जनरल इलेक्ट्रिक, वेस्टिंगहाउस, ईडीएफ जैसी वैश्विक कंपनियों की रुचि फिर से बढ़ सकती है।

सुरक्षा और जनहित सर्वोपरि

सरकार ने साफ किया है कि परमाणु क्षेत्र में किसी भी तरह की ढील सुरक्षा पर नहीं दी जाएगी। मसौदा नियमों पर 4 सितंबर 2026 तक जनता और हितधारकों से सुझाव मांगे गए हैं। अंतिम रूप देने से पहले सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा।

निष्कर्ष

भारत का परमाणु क्षेत्र अब नियंत्रित तरीके से प्राइवेट और सिद्ध विदेशी तकनीक के लिए खुल रहा है। सख्त नियामकीय निगरानी और चरणबद्ध मंजूरी की व्यवस्था के साथ यह कदम ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण है। सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए क्षमता विस्तार का यह मॉडल भारत को परमाणु ऊर्जा में नई ऊंचाई दे सकता है।

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